राजनीति में आगे बढ़ना महिलाओं के सामने पहाड़ से भी ज्यादा बड़ी चुनौती: संतोष भंडारी
Dehradun: पहाड़ चढ़ना आसान है, लेकिन राजनीति में षड्यंत्र और छींटाकशी के चलते महिलाओं के लिए आगे बढ़ना आसान नहीं है। यह कहना है, उत्तराखंड क्रांति दल की महिला केंद्रीय अध्यक्ष मेजर संतोष भंडारी (सेनि) का। उन्होंने यह बात यहां अमर उजाला डिजिटल में साक्षात्कार के दौरान कही।
वह, उत्तराखंड क्रांति दल के प्रति आभारी हैं कि दल ने उनकी पिछली पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्हें दल की महिला केंद्रीय अध्यक्ष बना दिया। राज्य आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी और दल की स्थिति पर उन्होंने कहा, अलग राज्य के लिए हजारों लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया, इसमें महिलाओं की अहम भूमिका रही।
उक्रांद से जुड़े पुराने लोग आंदोलनकारी तो थे, लेकिन राजनेता नहीं थे
महिलाओं ने कई वर्षों तक संघर्ष किया, इसमें 42 राज्य आंदोलनकारियों ने अपनी शहादत दी। जिसमें दो महिलाएं भी शामिल हैं, लेकिन उत्तराखंड अलग राज्य बनने के बाद चुनाव में राष्ट्रीय पार्टियां आगे आ गई। जबकि जिस दल ने कई वर्षों तक संघर्ष किया वे पीछे हो गया। इसकी एक बड़ी वजह रह रही कि उक्रांद से जुड़े पुराने लोग आंदोलनकारी तो थे, लेकिन राजनेता नहीं थे। उन्हें राजनीति में शतरंज की बिसात बिछानी नहीं आती थी।
महिलाओं ने कई वर्षों तक संघर्ष किया, इसमें 42 राज्य आंदोलनकारियों ने अपनी शहादत दी। जिसमें दो महिलाएं भी शामिल हैं, लेकिन उत्तराखंड अलग राज्य बनने के बाद चुनाव में राष्ट्रीय पार्टियां आगे आ गई। जबकि जिस दल ने कई वर्षों तक संघर्ष किया वे पीछे हो गया। इसकी एक बड़ी वजह रह रही कि उक्रांद से जुड़े पुराने लोग आंदोलनकारी तो थे, लेकिन राजनेता नहीं थे। उन्हें राजनीति में शतरंज की बिसात बिछानी नहीं आती थी।
वे सीधे, सच्चे और ईमानदार लोग थे। जबकि राष्ट्रीय दल जनता को फुसलाते चले गए, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। आरोप लगाया कि जनता राष्ट्रीय दलों से परेशान है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने राज्य की खनिज संपदा को बारी-बारी से लूटने का काम किया।
दल में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और महिलाएं शामिल हो रही हैं। ्रराज्य में आपदा के बारे में पूछे जाने पर दल की महिला केंद्रीय अध्यक्ष ने पिछले साल आई आपदा को मानव निर्मित बताया। उन्होंने कहा, उत्तरकाशी में आई आपदा पर्यावरण के साथ खिलवाड़ का नतीजा है। राज्य में हजारों पेड़ कट रहे हैं।
