राजनीति में सब कुछ जायज नहीं, खून पसीने से सींचा है पार्टी को
Haridwar: भाजपा के वरिष्ठ नेता सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत साफगोई के लिए जाने जाते हैं। उनके दिए बयान अक्सर राजनीतिक सुर्खियां बनते हैं और कई अर्थ निकाले जाते थे।
सवाल: राज्य बने 25 साल हो गए हैं। आप उत्तराखंड आंदोलन से भी जुड़े रहे। क्या राज्य सही दिशा में आगे बढ़ा है?
जवाब: राज्य में अस्थिरता का वातावरण बना रहता है, जो उसके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। हालांकि विकास हुआ है, रोजगार के अवसर बढ़े हैं और प्रति व्यक्ति आय तथा बजट में प्रगति हुई है। पहले लखनऊ की नजर पहाड़ की कंदराओं तक नहीं पहुंचती थी, लेकिन आज दूरस्थ क्षेत्रों के लोग भी सीएम से मिल सकते हैं। लोकतंत्र में चुने गए प्रतिनिधियों का असर विकास, समाज और नई पीढ़ी पर पड़ता है। इसकी खासियत यह है कि यदि प्रतिनिधि पसंद नहीं है, तो अगली बार उसे बदलकर किसी अच्छे व्यक्ति को चुन सकते हैं।
जवाब: मुझे लगता है कि इन घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं से दिशा दी जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति को अच्छी तरह संभाला। विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हें मारपीट या अराजकता का माध्यम नहीं बनना चाहिए। राहुल गांधी के चुनाव आयोग के घेराव के दौरान आकाशवाणी कार्यालय में घुसने जैसी घटनाएं भी उचित नहीं हैं। पीढ़ियों तक सत्ता संभालने वाले किसी पार्टी के वरिष्ठ नेता का ऐसा आचरण अराजकता फैलाता है। अराजकता फैलाने वालों को नियंत्रित करना जरूरी है।
