Dehradun: दैनिक दिनचर्या बदलाव और फास्ट फूड से बच्चे भी टाइप-वन मधुमेह से ग्रसित हैं। गुबारा क्लीनिक के माध्यम से ऐसे बच्चों को निशुल्क समग्र इलाज व देखभाल की जा रही है। प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में गुबारा क्लीनिक स्थापित किए हैं। इस साल 1150 बच्चों में मधुमेह की पहचान करने का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर बीते वर्ष देहरादून, हरिद्वार, बागेश्वर व ऊधमसिंहनगर जिले में मधुमेह ग्रसित बच्चों के इलाज और मधुमेह प्रबंधन के लिए गुबारा क्लीनिक की शुरूआत की गई थी। अब सरकार ने सभी जिलों में एक-एक क्लीनिक स्थापित किए हैं। जहां पर टाइप-वन मधुमेह बच्चों की निशुल्क इंसुलिन थेरेपी, ग्लूकोज की निगरानी, निर्धारित अंतराल पर स्वास्थ्य जांच, पोषण विशेषज्ञों के माध्यम से डाइट परामर्श, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की जा रही है।
गुबारा क्लीनिक योजना
प्रदेश सरकार ने गुबारा क्लीनिक में उपचार, रोकथाम, परामर्श और प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार टाइप-वन डायबिटीज के उपचार में थोड़ी सी भी देरी या कमी जीवन को खतरे में डाल सकती है। दिनचर्या के साथ खान-पान में बदलाव से बच्चों में मधुमेह की समस्या बढ़ रही है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य 2026-27 तक राज्य में टाइप-वन मधुमेह से प्रभावित 1150 बच्चों तक गुबारा क्लीनिक के माध्यम से लाभान्वित करना है।