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सड़क बनाने के काम आएगी पराली, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान ने बायो-बाइंडर प्रौद्योगिकी का किया अनावरण

Dehradun: अब हर साल पराली जलाने से होने वाली प्रदूषण की समस्या से निजात मिलने वाली है। सीएसआईआर भारतीय पेट्रोलियम संस्थान ने बायो बाइंडर प्रौद्योगिकी का अनावरण किया, जिसके तहत कृषि व बायोमास अपशिष्ट (विशेषकर धान की पराली) का इस्तेमाल करके सड़कें बनाई जाएंगी।

आईआईपी ने बायो-बाइंडर प्रौद्योगिकी पर आयोजित प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी कार्यक्रम किया, जिसमें वरिष्ठ वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधियों व अनुसंधान सहयोगी शामिल हुए। आईआईपी निदेशक डॉ.हरेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि बायो-बाइंडर प्रौद्योगिकी कृषि एवं बायोमास अपशिष्ट को पेट्रोलियम-आधारित बिटुमेन के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प में परिवर्तित कर सतत सड़क निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

बायो बाइंडर तकनीक के तहत शिलांग स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-40 पर 100 मीटर लंबे बायो-बाइंडर परीक्षण खंड का दीर्घकालिक मूल्यांकन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। सफल परिणामों के आधार पर आंध्र प्रदेश सरकार ने पांच किलोमीटर लंबा बायो-बाइंडर आधारित सड़क निर्माण मूल्यांकन कार्यक्रम शुरू किया है। सीएसआईआर-सीआरआरआई सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई और भारतीय सड़क कांग्रेस के साथ मिलकर इसके तकनीकी दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है। कार्यक्रम में सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. सी रवि शेखर व उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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