Wed. Jun 19th, 2024

आइआइटी रुड़की ने प्रोफेसर अरुण को दिया हाइड्रो एंड रिन्यूएवेबल एनर्जी पुरस्कार

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की ने डिपार्टमेंट आफ हाइड्रो रिन्यूएवेबल एनर्जी के प्रोफेसर अरुण कुमार को हाइड्रो रिन्यूएवेबल एनर्जी पुरस्कार प्रदान किया है। यह पुरस्कार शोधकर्ताओं को हाइड्रो रिसोर्स एसेसमेंट आप्टिमाइजेशन इंटीग्रेशन और नई तकनीकी विकास आदि के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए दिया जाता है

रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की ने डिपार्टमेंट आफ हाइड्रो रिन्यूएवेबल एनर्जी के प्रोफेसर अरुण कुमार को हाइड्रो रिन्यूएवेबल एनर्जी पुरस्कार प्रदान किया है। यह पुरस्कार शोधकर्ताओं को हाइड्रो रिसोर्स एसेसमेंट, आप्टिमाइजेशन, इंटीग्रेशन और नई तकनीकी विकास आदि के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए दिया जाता है।

आइआइटी रुड़की परिसर स्थित एचआरईडी सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर अजित के. चतुर्वेदी ने डिपार्टमेंट आफ हाइड्रो रिन्यूएवेबल एनर्जी में कार्यरत प्रोफेसर अरुण कुमार को हाइड्रो रिन्यूएवेबल एनर्जी पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर अरुण कुमार नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर लिमिटेड के चेयर प्रोफेसर और इंटरनेशनल हाइड्रो पावर एसोसिएशन के बोर्ड मेंबर भी हैं। वे डिपार्टमेंट आफ हाइड्रो रिन्यूएवेबल एनर्जी के संस्थापक वैज्ञानिक भी हैं। उनके नेतृत्व में डिपार्टमेंट आफ हाइड्रो रिन्यूएवेबल एनर्जी का विकास हुआ और यह स्माल हाइड्रो पावर के क्षेत्र में श्रेष्ठता का केंद्र बना और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा प्राप्त की। निदेशक ने कहा कि प्रोफेसर अरुण कुमार नदियों, झीलों और हाइड्रो पावर के पर्यावरण प्रबंधन में बीते 40 वर्ष से योगदान दे रहे हैं। उनका यह कार्य भारत सरकार के डिकार्बोनाइजेशन के महत्वपूर्ण लक्ष्य के समानांतर है। वहीं हाइड्रो पावर की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर गैर जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 2030 तक 500 गीगावाट करने का लक्ष्य है और ऊर्जा के नए संसाधनों की सहायता से 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का भी लक्ष्य निर्धारित है। क्योंकि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण ऊर्जा उत्पादन में भारी परिवर्तन हो सकता है। इस प्रकार हाइड्रो प्लांट पर आधारित संग्रहण अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि इनकी सहायता से हाई वेरिएबल सूर्य और पवन ऊर्जा को एकत्र कर पावर सिस्टम से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हाइड्रो पावर से विद्युत उत्पादन के अतिरिक्त अनेक लाभ हैं, जिनको ऊर्जा के क्षेत्र में डिकार्बोनाइजेशन के लिए सहभागिता संभव है।

 

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