Dehradun: बीते वर्ष पांच अगस्त को धराली की खीर गंगा में आई तबाही के करीब आधे घंटे बाद उससे करीब तीन किमी की दूरी पर स्थित हर्षिल की तेलगाड में भी आए मलबे ने सेना कैंप में आपदा का कहर बरपाया। उसमें करीब नौ सैनिक लापता हो गए थे। साथ ही तेलगाड से आए मलबे ने भागीरथी का जल प्रवाह रोककर वहां पर करीब डेढ़ किमी लंबी झील बना दी थी। उसके खतरे के कारण एक वर्ष बाद अब हर्षिल गांव के अस्तित्व पर खतरा बना हुआ है।
हालांकि गत माह झील और तेलगाड का जलस्तर बढ़ने के कारण हर्षिल में कटाव होने के कारण आवासीय सहित सरकारी भवनों को खतरा हो गया था। वहां पर जीएमवीएन का एक टिनशेड बहने के साथ ही कटाव के कारण सेना कैंप की ओर से विशालकाय वृक्ष टूटने के कारण नदी का प्रवाह रुकने का खतरा बना हुआ था। स्थानीय लोगों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन के निर्देश पर वहां पर नदी को चैनलाइज कर अस्थाई सुरक्षात्मक कार्य शुरु किए गए हैं। लेकिन अभी भी खतरा टला नहीं है।
गत वर्ष तेलगाड के मुहाने के समीप भूस्खलन के कारण एक झील बन गई थी। इसलिए अधिक बरसात में तेलगाड में इस झील के कारण दोबारा बढ़ी तबाही हो सकती है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ दल से वहां पर निरीक्षण करवाने की बात कही थी। लेकिन अभी तक वह निरीक्षण भी नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर भागीरथी में बनी झील की उचित निकासी और तेलगाड से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते हैं। तो यह भविष्य में हर्षिल के अस्तित्व पर बड़ा खतरा बन सकता है।