Dehradun: हर्षिल घाटी में बुग्याल सहित ताल व ट्रैक, ऊंचे वॉटरफाल और जैव विविधता का सुंदर संसार बसता है लेकिन आज भी धार्मिक सहित रोमांच और जैव विविधता व ट्रैकिंग के दृष्टिकोण से पर्यटन मानचित्र पर स्थान नहीं मिल पाया है। हालांकि स्थानीय लोगों की ओर से इन पर्यटक स्थलों के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य किया जा रहा है लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से सहयोग नहीं मिल पाया है। लोगों का कहना है कि बुग्याल, तालों व ट्रैक को विकसित किया जाता है तो इससे घाटी के आठ गांव के लोग रोजगार से जुड़ेंगे।
गढ़वाल माउंटेनियरिंग व ट्रैकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा ने बताया कि हर्षिल घाटी में ब्रहमीताल सहित काणाताल, ऋषि वन, मोनाल ट्रेल, अवाणा, कंडारा, मंगला छु ताल, खादरा वाटरफाल और सुमेरू पर्वत आदि स्थित है। यह स्थान अपनी जैव विविधता सहित ट्रैक व प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। साथ ही इन सभी स्थानों का केदारखंड में धार्मिक महत्व है लेकिन आज तक इन स्थानों को पर्यटन मानचित्र पर स्थान नहीं मिल पाया है।
उन्होंने कहा कि अगर इनको विकसित किया जाता है तो इससे स्थानीय लोगों को भी होमस्टे, गाइड, वाहनों के माध्यम से रोजगार मिलेगा। बताया कि यह सभी स्थान समुद्रतल से करीब 11 से 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। साथ ही वहां पर भी दुर्लभ वन्य जीव सहित औषधियां, पक्षियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं।