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सत्र के दौरान अरविंद केजरीवाल ने किसान आंदोलन पर अपनी बात रखी, साथ ही कुछ खास जानकारियां भी साझा की

दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र शुक्रवार को शुरू हुआ। इस विशेष सत्र को सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी संबोधित किया। सत्र के दौरान उन्होंने किसान आंदोलन पर अपनी बात रखी, साथ ही कुछ खास जानकारियां भी साझा की। उन्होंने बताया कि जब किसान दिल्ली की ओर आ रहे थे तो केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली सरकार को पत्र भेजकर स्टेडियम को जेलों में तब्दील करने के लिए कहा गया था मगर उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया था।

उन्होंने कहा कि आज से पूरे एक साल पहले किसान आंदोलन शुरू हुआ था। केंद्र ने अपने अहंकार में तीनों कृषि कानून पास कराए थे। मैं बेवजह किसानों से बधाई ले रहा हूँ। सभी इस आंदोलन में शामिल हुए। बताया कि पंजाब के लोगों ने आंदोलन की अगुवाई की है। ठंड और बारिश में किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे रहे। दुनिया के इतिहास में यह सबसे बड़ा आंदोलन था, अब किसानों की जीत हुई है। सत्तापक्ष ने किसानों को भड़काने में कोई कसर नही छोड़ी। 700 किसान शहीद हो गए हैं।

उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान किसानों को बहुत कुछ कहा गया है, इन्हें परेशान करने में कोई कसर नही छोड़ी गई। सड़क पर कीलें तक गाड़ी गईं। किसानों ने सभी कुछ सहा है। उन्होंने बताया कि मेरे पास फाइल आई कि किसान आ रहे हैं स्टेडियमों को जेल बनाया जाना है। मगर मैंने मना कर दिया। इससे केंद्र सरकार हम पर बहुत नाराज हुई। उन्होंने कहा कि जो किसानों की मांगें बची हैं उन्हें केंद्र को मानना चाहिए। किसानों की फसल का न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया जाना चाहिए। किसान जब तक दिल्ली की सीमाओं पर तक बैठे हैं हम उनके साथ हैं।

इस मौके पर उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सदन के माध्यम से देश की किसान शक्ति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गांधी जी के बाद पहली बार ऐसा आंदोलन हुआ, जिसने अहंकारी सरकार को झुकने पर विवश कर दिया। बहुत धैर्य के साथ आंदोलन चला। नई पीढ़ी के लिए मिसाल है। प्रधानमंत्री ने एक साल तक किसानों की अनदेखी की। किसानों को बहुत हल्के में लिया। सोचा कि किसान दिल्ली में आएंगे तो उन्हें स्टेडियमों में कैद कर देंगे। लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र के मंसूबों को सफल नहीं होने दिया। भाजपा ने हमेशा इस आंदोलन की आलोचना की। बार बार कृषि मंत्री और प्रधानमंत्री इस आंदोलन के खिलाफ बोलते रहे। फिर भी किसान डटे रहे। वे बधाई के पात्र हैं।

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