Dehradun: बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच के बीच बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने आरोपी कर्मचारी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा दिया है। समिति ने उसे फिलहाल प्रोटोकॉल और थाली भेंट गणना (दान एवं चढ़ावे की रकम की गणना) की ड्यूटी से मुक्त कर दिया है।
आरोपी कर्मचारी बदरीनाथ धाम में प्रोटोकॉल और थाली भेंट गणना कार्य से जुड़ा हुआ था। ये दोनों व्यवस्थाएं मंदिर संचालन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। प्रोटोकॉल व्यवस्था में पांच कर्मचारी तैनात रहते हैं जबकि थाली भेंट गणना कार्य में छह कर्मचारी अपनी सेवाएं देते हैं। आरोपी कर्मचारी को प्रोटोकॉल का नोडल अधिकारी भी बनाया गया था।
सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने कहा कि जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आरोपी कर्मचारी को प्रोटोकॉल और थाली भेंट गणना कार्य से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ की जा रही है।
बीकेटीसी ने बनाई चार सदस्यीय समिति
बदरीनाथ धाम में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के एक कर्मचारी पर लगे आर्थिक हेराफेरी के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए समिति ने चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने समिति को एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सीसीटीवी की जांच के लिए आंतरिक टीम (विभागीय) भी गठित कर दी गई है।
चढ़ावा प्रकरण पर तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने जताई चिंता
उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने बदरीनाथ चढ़ावा प्रकरण पर चिंता व्यक्त की है। कहा इस तरह की घटना से मंदिर समिति की छवि खराब होने के साथ ही श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं। महापंचायत ने कहा इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।
चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल एवं महासचिव डॉ. बृजेश सती ने संयुक्त बयान में कहा कि एक माह के अंदर बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष की ओर से दो जांचों के आदेश दिए गए हैं। इसमें एक जांच का खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। इस बीच एक और जांच के आदेश दिए गए हैं। महापंचायत पदाधिकारियों ने कहा इस तरह की घटना से करोड़ों सनातन धर्मवालंबियों की भावना आहत हो रही है। इससे गलत संदेश जा रहा है। कहा विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर की छवि को धूमिल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। महा पंचायत ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर समिति को कठोर कदम उठाने का सुझाव दिया।