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कविताएं बच्चों को मानवीय मूल्यों से जोड़ती हैं :- प्रोफेसर डीके पाठक

शिक्षक दिवस पर बालप्रहरी ने 160 शिक्षकों को सम्मानित किया

अल्मोड़ा। बच्चों की पत्रिका बालप्रहरी तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा शिक्षक दिवस 2021 के अवसर पर देश के 160 सृजनशील शिक्षको को रचनात्मक शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित ऑनलाइन अखिल भारतीय शिक्षक कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड के निदेशक प्रो. डी.के.पाठक ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि हमें शिक्षण कार्य को एक व्यवसाय के तौर पर नहीं एक मिशन के तौर पर करना चाहिए। बाल कविता के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बच्चों को कहानी तथा कविताएं अच्छी लगती हैं। बच्चे गुनगुनाते हुए जहां कविता का आनंद लेते हैं वहीं कहीं न कहीं कविताएं बच्चों को मानवीय तथा सामाजिक मूल्यों से जोड़ती हैं।
उत्तराखंड शिक्षा विभाग के उपनिदेशक श्री आकाश सारस्वत ने कहा कि बचपन में मां हमारी पहली शिक्षक होती है। उन्होंने कहा कि जो लोग पेशे से शिक्षक हैं केवल वही शिक्षक या गुरू हैं ऐसा नहीं है। व्यवहारिक जीवन में जो भी हमें कुछ सीख देता है वह गुरू हैं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी बच्चे भी हमें काफी कुछ सीखाते हैं। उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। हम बड़े लोग भी नित नई-नई चीजें सीखते रहते हैं। जो हमें सीखाता है उसका हमें ऋणी होना चाहिए। उन्होंने कहा जो निःस्वार्थ भाव से ज्ञान बांटता है वहीं गुरू है। उन्होंने कहा देने वाला हमेशा गुरू होता है जबकि लेने वाला छोटा होता है।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बागेश्वर के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र धपोला ने कहा कि शिक्षक हमारी धरोहरों को संरक्षित रखने का कार्य करते हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृश्णन के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि एक अच्छे शिक्षक को बच्चे अपने पूरे जीवन भर याद करते हुए अपना आदर्श मानते हैं। बाल कविता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि शिशु साहित्य,बालसाहित्य तथा किशोर साहित्य में कविताओं का महत्वपूर्ण स्थान है। कविताएं कहीं न कहीं संवेदनाओं की जननी हैं। उन्होंने कहा सद्साहित्य पढ़कर कई महापुरूषों का हृदय परिवर्तन हो गया।
चार चरणों में आयोजित अखिल भारतीय शिक्षक कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ बालसाहित्यकार अश्विनी पाठक(जबलपुर), डॉ.शेषपालसिंह शेष’ (आगरा), माया पंत(पिथौरागढ़), डॉ.कृष्णा आचार्य(उदयपुर) ने की। संचालन नीरज पंत, डॉ. अशोककुमार नेगी, हेमा तिवारी भट्ट तथा विमला जोशी ‘विभा’ ने किया। कवि सम्मेलन में देश के 15 राज्यों के 160 शिक्षकों ने बाल कविताएं पढ़ी। साहित्य सृजन, शिक्षण कौशल तथा बालसाहित्य में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सभी शिक्षकों को ‘रचनात्मक शिक्षक सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
प्रारंभ में बालप्रहरी के संरक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्याम पलट पांडेय ने सभी का स्वागत किया। आयोजक मंडल की ओर से अंत में डॉ. अशोककुमार नेगी ने सभी का आभार व्यक्त किया। प्रारंभ में बालप्रहरी के संपादक तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा के सचिव उदय किरौला ने सभी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन में कई साहित्यकार,अभिभावक,शिक्षक तथा बच्चे उपस्थित थे।

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